– जिला एटा थाना जैथरा गांव बन्ना रोड स्थित ईंट भट्टा मालिक तथा ठेकेदार ने बिहारी मजदूर को खाली हाथ भेजा – उपचार के अभाव में गरीब ने खोया बेटा, बेटी मरणासन्न हालत में
कायमगंज / फर्रुखाबाद 17 अक्टूबर 2022
मूल निवासी बिहार प्रांत जिला गया के गांव जगदीशपुर का निवासी धर्मेंद्र अपनी पत्नी तथा दो अबोध बच्चों के साथ पेट की भूख मिटाने की खातिर जनपद एटा थाना जैथरा क्षेत्र के बरना रोड तथा इसी गांव के पास स्थित जेपी ठाकुर भट्टे पर मजदूरी करने आया था । धर्मेंद्र ने बताया कि वह ईट पाथने पर लगा था । उसका ठेकेदार किशन यादव तथा सुमन यादव है। आंखों में आंसू लिए पीड़ित मजदूर ने कहा कि उसका 3 साल का बेटा अवधेश और लगभग साढ़ेचार साल की बेटी शिवानी पिछले एक सप्ताह से तेज बुखार के कारण बीमार चल रहे थे। उसने , उनके इलाज के लिए भट्टा मालिक ठाकुर साहब तथा ठेकेदार से हाथ जोड़कर मदद मांगी। लेकिन उसे कोई सहारा नहीं मिला। बच्चों की खातिर वह आज सुबह भट्टे से निकलकर अपने गांव बिहार प्रांत के लिए चला था। जहां वह पहुंच कर किसी से कर्ज लेकर भी अपने बच्चों का इलाज कराना चाह रहा था। आगे उसने बताया कि जब वह जैथरा से चलकर कायमगंज रेलवे स्टेशन पर पहुंचा। उस समय तक उसके पास जो कुछ 50या 100 थोड़े रुपए थे। वह सभी यहां तक पहुंचने में ही किराए भाड़े में खर्च हो गए। वह किसी तरह अपने बच्चों की जान की खातिर अपने गांव बिहार पहुंचना चाहता था। लेकिन मजबूर था । कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही थी। उसके अनुसार जब वह भट्टे से चला था तो उसने भट्टा मालिक और ठेकेदार से कहा कि उसकी मजदूरी ही दे दो। अगर कोई और मदद नहीं कर सकते। लेकिन इस पीड़ित पिता को भट्टा मालिक और ठेकेदार ने फूटी कौड़ी भी नहीं दी। मजबूर होकर वह वहां से चलकर कायमगंज पहुंचा था । रेलवे स्टेशन पर ही उसे कोई सज्जन मिले । उन्होंने कहा कि इसी कस्बे में सरकारी अस्पताल चले जाओ । वहां अच्छे डॉक्टर हैं । बच्चों का इलाज करा लो ।किसी तरह भटकता हुआ मजदूर दंपत्ति बच्चों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक आ गया । लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। यहां आते ही ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर विपिन सिंह ने देखते ही उसके बेटे अवधेश (3) को मृत घोषित कर दिया । वही शिवानी(4) की गंभीर हालत बताकर उसे डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल फर्रुखाबाद के लिए रेफर कर दिया गया। लेकिन बेचारे मजदूर के पास में तो बच्चे को दफनाने के लिए और ना ही बेटी शिवानी को फर्रुखाबाद तक ले जाने के लिए रुपए पास में थे। इसलिए लाचार दंपत्ति जिसकी बेटी मरणासन्न हालत में यही अस्पताल बेड पर पड़ी है और बेटे की लाश जो अस्पताल परिसर में रखी है। उससे लिपट कर मां दहाड़े मार कर रो रही है, और पिता कभी बेटे के शव को निहारता है तो कभी गंभीर हालत में आ चुकी बेटी शिवानी की ओर देखकर ईश्वर से उसके ठीक होने की दुआएं मांग रहा है।
इस दुखद घटना की सूचना पाते ही तमाम लोगों की भीड़ अस्पताल परिसर में जमा हो गई। जहां से भट्टा मालिक को फोन करके जानकारी करने का प्रयास किया गया। तो उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र बिहारी मजदूर आज सवेरे ही उसके भट्टे से छुट्टी लेकर चला गया था। उसके पास रुपया था अथवा नहीं यह पूछे जाने पर ठाकुर साहब ने कोई सही जवाब नहीं दिया । इसके तुरंत बाद मीडिया कर्मियों ने तथा अस्पताल के डॉक्टर ने उनसे फोन पर संपर्क कर जानकारी देते हुए उनके कर्तव्य के साथ ही उनकी जिम्मेदारी बता कर मदद करने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि ठीक है। मैं किसी को भेज रहा हूं और यह कह कर फोन काट दिया। यह घटना कितनी दुखद और पीड़ादायक है। जिसे देखकर और सुनकर यह बात साफ हो जाती है कि कितनी भी डींगे हांक ली जाएं । किंतु आज भी भारत में गरीबों की जिंदगी बद से बदतर एवं पूरी तरह अभावग्रस्त है। यदि ऐसा नहीं है तो इस बिहारी मजदूर को बिहार से आकर उत्तर प्रदेश के जनपद एटा में मजदूरी क्यों करनी पड़ती। यदि करनी भी पड़ती तो उसकी मजदूरी का भुगतान तक तो भट्टा मालिक और ठेकेदार को कर ही देना चाहिए था। भले ही वे पूरी निर्दयता दिखाते हुए उसकी और आर्थिक सहायता ना करते। लेकिन विडंबना है कि गरीबों की जिंदगी को यह लोग अथवा ऐसे व्यक्ति जिंदगी ही कहां समझते हैं। यदि समझते तो आज बुखार से पीड़ित बिहारी मजदूर धर्मेंद्र को अपना अबोध बेटा खोना नहीं पड़ता । वही जिंदगी और मौत से जूझ रही मरणासन्न हालत में बिस्तर पर पड़ी अपनी बेटी को बेबस और लाचार होकर देखना नहीं पड़ता। यहां कायमगंज अस्पताल में जमा हुए लोग आपस में चंदा कर इस गरीब की मदद करने की चर्चा समाचार लिखे जाने तक अवश्य कर रहे थे। लेकिन इतनी बड़ी दुख भरी घटना के बाद बिहारी दंपत्ति के आंसू नहीं रुक रहे हैं ।क्या ऐसी मानवता विहीन श्रमिक शोषण बाले घटना क्रम पर प्रशासन और शासन गंभीरता दिखाते हुए कोई कार्यवाही करेगा अथवा नहीं यह कह पाना तो अभी संभव नहीं है?
ब्यूरो रिपोर्ट = जयपाल सिंह यादव / दानिश खान
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