Delhi news मुफ्त विदेश यात्रा, लग्जरी तोहफे और महंगी दवाएं: क्या टूटेगा फार्मा कंपनियों और डॉक्टरों का ‘अपवित्र गठजोड़’?

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Delhi news सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला; केंद्र सरकार बनाएगी 3 सदस्यीय पैनल, शिकंजे में आएंगे दवा लॉबी के ‘फ्रीबीज’

नई दिल्ली:

क्या आपका डॉक्टर आपको वही दवा लिख रहा है जो आपकी बीमारी के लिए जरूरी है, या फिर उस दवा के पीछे फार्मा कंपनियों के महंगे गिफ्ट, फाइव-स्टार होटल के बिल और स्विट्जरलैंड-पेरिस के मुफ्त हॉलिडे पैकेज छिपे हैं? डॉक्टरों और दवा कंपनियों के बीच वर्षों से चल रहे इस ‘अनैतिक गठजोड़’ पर अब देश की सबसे बड़ी अदालत का डंडा चलने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने फार्मा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को दिए जाने वाले महंगे उपहारों, ट्रैवल ट्रिप्स और हॉस्पिटैलिटी पर सख्त कानूनी नकेल कसने की मांग वाली याचिका पर अपनी विस्तृत सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत के सामने यह कड़वी हकीकत खुल कर सामने आई कि कैसे चंद अनैतिक फार्मा कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को महंगे गैजेट्स, सोने के सिक्के, सेमिनार के नाम पर परिवार समेत विदेश यात्राएं और लग्जरी सुविधाएं परोसती हैं। इस ‘फ्रीबीज कल्चर’ का सीधा खामियाजा आम मरीज को भुगतना पड़ता है। डॉक्टर सस्ती जेनेरिक दवाओं की जगह वही महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं, जिनका कमीशन या नजराना उन्हें पहले ही मिल चुका होता है। दवा कंपनियां इन ‘गिफ्ट्स’ का पूरा खर्च दवाओं की एमआरपी में जोड़कर सीधे मरीज की जेब काटती हैं। सुनवाई के दौरान मौजूदा नियमों की सबसे बड़ी खामी भी बेनकाब हुई। मौजूदा ‘यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज’ (UCPMP) अब तक केवल एक स्वैच्छिक गाइडलाइन बनकर रह गया है, जिसका कोई कानूनी डंडा नहीं है। मेडिकल काउंसिल के नियम रिश्वत लेने वाले डॉक्टरों पर तो कार्रवाई की बात करते हैं, लेकिन रिश्वत देने वाली दिग्गज फार्मा कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए कोई मजबूत और दंडात्मक कानूनी प्रावधान नहीं है। इसी दोहरे रवैये को लेकर याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि फार्मा कंपनियों के लिए भी एक बाध्यकारी और सख्त कानूनी ढांचा तय किया जाएगा । मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को सूचित किया है कि वह इस अनैतिक खेल पर लगाम लगाने के लिए एक 3 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन कर रही है। यह समिति डॉक्टरों और फार्मा कंपनियों के बीच गिफ्ट कल्चर को रोकने, मौजूदा दिशा-निर्देशों की समीक्षा करने और एक सख्त कानूनी ढांचे की जरूरत व उसके स्वरूप की जांच कर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी।

​सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षित फैसले पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं। यदि अदालत ने इस गठजोड़ पर सख्त कानूनी दिशा-निर्देश जारी किए, तो दवा बाजार में वर्षों से फल-फूल रहे इस काले कारोबार की कमर टूटना तय है।

ब्यूरो चीफ जयपाल सिंह यादव दानिश खान

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