सावन महीने में भी पड़े सूखे से किसानों की बर्बादी के आ रहे संकेत, वही भीषण गर्मी से सभी बेहाल

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शमसाबाद फर्रुखाबाद 1अगस्त 2022 सावन के महीने में भीषण गर्मी का दौर जारी। नदी नाले और तालाब सूखे। पशु पक्षियों की शामत। गरीब किसानों की हालत खस्ता मायूस किसानों ने भगवान इंद्र देव से बरसात की कामनाये की। आधे महीने से भी ज्यादा सावन का महीना गुजर चुका है । मगर भीषण गर्मी का पारा अभी भी चढ़ा हुआ है। एक लंबा समय गुजरने के बावजूद भी अभी तक शमसाबाद में ऐसी बरसात नहीं हुई जिससे आम जनमानस राहत पा सके। वर्षा के अभाव में मायूस किसानों ने भगवान इंद्र देब की नाराजगी पर दुख जताते हुए कहा बरसात न होने के कारण किसानों की फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ा है । कुछ ऐसी फसलें हैं ,जिन्हें सिंचाई की अति आवश्यकता है । इन फसलों को बचाने के लिए उन्हें प्राइवेट स्तर पर सिंचाई करना पड़ रहाहै। धान की खेती करने वाले किसानों ने भी अफसोस जताते हुए कहा कि अभी तक ऐसा पानी नहीं बरसा जिस से धान की फसल की रोपाई का कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सके। कृषि कार्य से नाता जोड़े किसानों में राजेश कुमार दयाराम बृजेश कुमार सुंदरलाल जलील हमीद प्रेमपाल राजाराम सहित तमाम किसानों ने बताया बरसात ना होने के कारण निचली गंगा नहर में भी पर्याप्त पानी नहीं। जबकि एक समय था ।जब निकली गंगा नहर के सहारे सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा फसले तैयार होती थी । हालात यह है कि फसलों की सिंचाई के लिए नहर को बंधक बनाना पड़ रहा है। इसके अलावा बरसात के ही अभाव में नदी नाले सब कुछ लगभग सूखे देखे जा रहे हैं। गांव गली में तालाब बिल्कुल सूखे हुए देखे जा रहे हैं। तालाबों में दरारें देखी जा रही हैं। साथ ही तालाबो के आसपास खेतों में फसलें सूखती हुई देखी जा रही हैं। उधर बारिश के अभाव में सूख रही फसलों को देखकर किसानों ने भगवान इंद्र देव के प्रति आस्था जताते हुए कहा एक समय था जब सावन के महीने में जमकर बरसात होती थी। लोगों का संभालना मुश्किल हो जाता था। लेकिन आजकल सावन का महीना सूखा देखा जा रहा है । लोगों का यह भी कहना है रक्षाबंधन का त्यौहार भी सर पर है। क्या इस बार सूखे तालाबों में भुजरियों का विसर्जन किया जाएगा। जानकार लोगों का कहना है शायद ऐसा कोई समय हो जब भुजरियों का सूखे तालाब में विसर्जन किया गया हो । तालाबो में भगवान इंद्रदेव की मेहरबानियों का इतना जल होता था ।कि तालाबों में भुजरिया विसर्जन करने वाली महिलाएं आसपास में हरियाली देखकर खुश हो जाया करती थी। लेकिन इस बार ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है ।क्योंकि आसमान में बादल तो छाते हैं, लेकिन बारिश के नाम पर ठेका दिखा कर चले जाते हैं। बर्बादी की दहलीज पर बैठा किसान चुपचाप सूनी आंखों से बर्बादी के नजारे को देख रहा है। किसानों का कहना है जब भी कोई फसल तैयार की जाती है। तो हजारों रु0 खर्च हो जाते है। दुख है इस बार भगवान इंद्र की मेहरबानियां किसानों की ओर से कोसों दूर नजर आ रही हैं।

 

रिपोर्ट मनोज सक्सेना शमसाबाद

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