Bihar news पुरानी परंपरा का जीवंत प्रमाण बनी बारात आगमन सज्जा व्यवस्था

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Bihar news -न डीजे, न आतिशबाजी… 22 बैलगाड़ियों की बारात ने समस्तीपुर को लौटा दिए पुराने दिन,  शादी बनी शहर में चर्चा
साभार :-
समस्तीपुर/ बिहार
बुधवार की शाम शहर की सड़कों पर नजारा बिल्कुल बदला-बदला सा था। न डीजे की कानफोड़ू आवाज, न रोशनी की चकाचौंध ना आतिशबाजी का धुंआ और न ही लग्जरी गाड़ियों की कतारें। अगर कुछ सुनाई दे रहा था तो बैलों की सधी हुई चाल, लकड़ी की बैलगाड़ियों की मद्धिम चरमराहट और लोकगीतों की कोमल सुरीली तान। यह दृश्य देख हर राहगीर ठिठक गया, मोबाइल कैमरे निकल आए और हर जुबां पर बस एक ही सवाल था—“अब भला बैलगाड़ी से भी कोई बारात जाता है?”
कारोबारी के बेटे की देसी थीम शादी
दरअसल, यह अनोखी और पूरी तरह देसी थीम वाली बारात शहर के जाने-माने कारोबारी प्रदीप सेठ के पुत्र आलोक की शादी की थी। गोला रोड स्थित होटल से जैसे ही शाम ढलते-ढलते बारात निकली, मानो वक्त कुछ पलों के लिए पीछे लौट गया।
दूल्हा आलोक सजे-धजे रथ पर सवार था—सिर पर सेहरा, चेहरे पर सादगी भरी मुस्कान और मन में परंपरा को जीने का संकल्प। उसके पीछे-पीछे 22 सजी-धजी बैलगाड़ियों का कारवां धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
बैलगाड़ी पर ‘शाही सवारी’ का एहसास
इन बैलगाड़ियों पर बैठे बाराती किसी शाही सवारी का आनंद ले रहे थे। कहीं सोफा सेट लगाए गए थे, तो कहीं गद्दों पर बैठकर लोग लोकधुनों के साथ झूमते नजर आए। करीब दो किलोमीटर का सफर तय कर जब यह अनूठी बारात मथुरापुर स्थित गजराज पैलेस पहुंची, तब तक यह सिर्फ एक विवाह जुलूस नहीं, बल्कि शहर की सबसे बड़ी चर्चा बन चुकी थी।
पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त बारात
इस बारात की सबसे बड़ी खासियत थी इसका Eco Friendly होना। न धुएं का गुबार, न शोर-शराबा—सिर्फ उल्लास, अपनापन और प्रकृति के साथ सामंजस्य। बैलगाड़ियों के पहियों की आवाज, फूलों की खुशबू और लोकगीतों की तान ने ऐसा माहौल रचा, जैसे गांव की आत्मा खुद इस विवाह की साक्षी बन गई हो।
पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश
कार्यक्रम संयोजक और पशुप्रेमी महेंद्र प्रधान बताते हैं कि इस देसी और पर्यावरण-संवेदनशील आयोजन के लिए आसपास के गांवों से करीब 35 जोड़ी बैलगाड़ियों को बुलाया गया था। सभी बैलगाड़ियों को पारंपरिक अंदाज में सजाया गया। खास मेहमानों के लिए बैलगाड़ियों पर सोफा लगाए गए, जबकि अन्य के लिए गद्दों की व्यवस्था की गई।
बारात को देखकर किसी ने कहा—“यह तो असली शादी है”, तो किसी ने इसे परंपरा और आधुनिक सोच का सुंदर संगम बताया।
=सादगी भी हो सकती है भव्य =
शोर और दिखावे के इस दौर में यह देसी थीम वाली शादी यह संदेश दे गई कि सादगी, संस्कृति और पर्यावरण के साथ भी उत्सव उतना ही भव्य हो सकता है। वहीं दूल्हा आलोक ने मुस्कुराते हुए कहा कि कुछ अलग करने की इच्छा थी, लेकिन यह आयोजन शहर भर में ऐसी चर्चा बनेगा, इसकी उन्होंने भी कल्पना नहीं की थी।

ब्यूरो चीफ जयपाल सिंह यादव दानिश खान

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