KAIMGANJ NEWS PWD ने जेसीबी चलाकर निकाला पानी, गड्ढों में भरवाई गिट्टी; सड़क किनारे मिट्टी के टीले बने नई मुसीबत—स्थायी समाधान के दावों के बीच जिम्मेदार विभागों की खींचतान भी उजागर
कायमगंज, फर्रुखाबाद। कायमगंज-फर्रुखाबाद मार्ग पर जलभराव और गड्ढों की समस्या ने एक बार फिर सड़क निर्माण और जल निकासी की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) हरकत में आया और जेसीबी की मदद से सड़क किनारे खुदाई कर जलभराव का पानी बाहर निकलवाया गया। सड़क पर बने गड्ढों में गिट्टी डालकर उन्हें भरने का भी काम किया गया। विभाग की इस कार्रवाई से फिलहाल राहगीरों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क किनारे जेसीबी से खोदी गई मिट्टी के बड़े-बड़े टीले अब सड़क के किनारे पड़े हैं। ऐसे में यदि दोबारा बारिश होती है तो यही मिट्टी बहकर सड़क पर आ सकती है और जलभराव के साथ सड़क पर कीचड़ की समस्या भी खड़ी हो सकती है। लोगों का कहना है कि हर बार अस्थायी इंतजाम करने के बजाय जल निकासी की मूल समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए।
मौसम साफ होते ही होगा स्थायी निर्माण : PWD
PWD के सहायक अभियंता अरविंद कुमार ने बताया कि फिलहाल जलभराव से राहत दिलाने के लिए पानी की निकासी कराई गई है और गड्ढों में गिट्टी डलवाई गई है। मौसम साफ होते ही सड़क का स्थायी निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि जलभराव की प्रमुख वजह सड़क किनारे पानी की निकासी का रास्ता अवरुद्ध होना है।

अधिकारी के अनुसार सड़क किनारे एक निजी जमीन मालिक द्वारा सड़क की सतह से काफी ऊंचा नाला बनवा दिया गया है, जिसके कारण पानी आगे नहीं निकल पा रहा है। इससे बारिश का पानी सड़क पर ही जमा हो जाता है।
ग्राम पंचायत और नगर पालिका के बीच जिम्मेदारी का खेल!
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जल निकासी की व्यवस्था आखिर किसकी जिम्मेदारी है? सहायक अभियंता के मुताबिक संबंधित क्षेत्र ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। ग्राम प्रधान से नाले की सफाई कराने के लिए कहा गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से भी संपर्क किया गया, मगर वहां से भी इसे ग्राम पंचायत क्षेत्र बताते हुए जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया गया। खंड विकास अधिकारी से भी समस्या के समाधान की अपेक्षा की गई, लेकिन मामला जस का तस बना रहा।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि सड़क पर पानी भरे, राहगीर परेशान हों और विभाग एक-दूसरे की ओर जिम्मेदारी टालते रहें तो आखिर जनता किसके दरवाजे पर दस्तक दे?
तालाब की जमीन पर प्लाटिंग के आरोपों ने बढ़ाई हलचल
जलभराव की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने इससे भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस स्थान पर जलभराव की समस्या बनी हुई है, उसके ठीक सामने सड़क के उत्तरी ओर कभी एक बड़ा तालाब हुआ करता था। आरोप है कि तालाब की जमीन को मिट्टी से भरकर समतल किया गया और बाद में वहां प्लाटिंग शुरू कर दी गई।

स्थानीय लोगों का दावा है कि पुराने राजस्व अभिलेखों की जांच कराई जाए तो संबंधित जमीन का पुराना स्वरूप तालाब के रूप में सामने आ सकता है। आरोप यह भी हैं कि प्रभावशाली लोगों ने तालाब की जमीन पर कब्जा कर उसे प्लाटिंग में बदल दिया और वहां बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। यदि पुराने राजस्व अभिलेखों और वर्तमान भू-अभिलेखों की जांच कराई जाती है तो पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

तालाब पाटा, रास्ता रोका और पानी के निकास पर लगा ब्रेक!
स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालाब को भरने और जमीन को समतल करने के बाद उसके चारों ओर निर्माण करा दिया गया। इसके अलावा सड़क से ऊंचाई पर पक्का नाला बनाए जाने से पानी के प्राकृतिक बहाव में भी बाधा उत्पन्न हो गई। लोगों का कहना है कि जिस ओर बारिश का पानी पहले स्वाभाविक रूप से जाता था, वह रास्ता भी अब बंद हो चुका है।
एक अन्य स्थान पर पानी की निकासी के लिए अलग से नाली/नलनुमा व्यवस्था बनाए जाने की बात भी सामने आ रही है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार वह भी वर्तमान में बंद पड़ी है। नतीजा यह है कि बारिश होते ही पानी का दबाव सड़क पर बढ़ जाता है और मार्ग पर जलभराव की स्थिति बन जाती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी होगी जांच?
स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब और प्राकृतिक जल स्रोतों के स्वरूप में मनमाना बदलाव नहीं किया जा सकता। उनका सवाल है कि यदि संबंधित जमीन वास्तव में पुराने अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है तो उसे भरकर प्लाटिंग किए जाने की अनुमति कैसे मिली? यदि अनुमति नहीं मिली तो इतने बड़े भू-भाग पर निर्माण और प्लाटिंग किसकी निगरानी में होती रही?
अब लोगों की निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि राजस्व अभिलेखों की जांच कराकर जमीन की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए, तालाब की जमीन पर हुए कथित कब्जे और प्लाटिंग की निष्पक्ष जांच हो तथा जल निकासी के पुराने रास्ते को बहाल कराया जाए।
अस्थायी मरम्मत से नहीं बुझेगी समस्या की आग
फिलहाल PWD ने सड़क पर गिट्टी डालकर और पानी निकलवाकर राहत देने का प्रयास किया है, लेकिन जलभराव की असली वजह यदि जल निकासी का अवरुद्ध होना और कथित रूप से तालाब की जमीन के स्वरूप में बदलाव है, तो महज गड्ढों में गिट्टी भरने से समस्या खत्म होना मुश्किल है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले में सिर्फ सड़क की मरम्मत तक सीमित रहता है या फिर राजस्व अभिलेख खंगालकर कथित तालाब की जमीन, प्लाटिंग, बाउंड्रीवाल और जल निकासी के बंद रास्ते की भी जांच कराता है। यदि पुराने अभिलेखों में तालाब का अस्तित्व सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी या मामला एक बार फिर विभागीय पत्राचार और जिम्मेदारी टालने की भेंट चढ़ जाएगा—यह आने वाला समय बताएगा।
ब्यूरो चीफ जयपाल सिंह यादव दानिश खान

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