Kaimganj news –कायमगंज/ फर्रुखाबाद 6 जुलाई 2023
करोडों मूल्य की कीमती शत्रु संपत्ति जमीनी विवाद का यह मामला कायमगंज तहसील क्षेत्र के गांव याहियापुर का प्रकाश में आया है। अगर यह संपत्ति शत्रु संपत्ति घोषित होती है। तो लखनऊ के महमूदाबाद के राजा की शत्रु संपत्ति के बाद प्रदेश में दूसरे नंबर की कीमती शत्रु संपत्ति होगी। आरोप है कि अधिनियम के विपरीत धोखाधड़ी करके कुछ व्यक्ति इस शत्रु संपत्ति को अवैध रूप से बिना किसी वाजिब अधिकार के ही विक्रय कर रहे थे। इस शत्रु संपत्ति के मामले में ग्रामीणों की शिकायत के बाद तहसील प्रशासन की ओर से टीम गठित कर दी गई है। सम्पत्ति की कीमत 80 करोड़ रुपए से भी अधिक की बताया जा रही है। प्रशासन अगर चाहे तो 24 घंटे में जांच कर इसकी सत्यता का पता लगा कर इसे शत्रु संपत्ति घोषित होने का रास्ता साफ कर सकता है।
यह जमीन अभिलेखों में अली जफर खा उर्फ जफर अली की है। जो पाकिस्तान चले गए। वहां की नागरिकता ले ली। इस जमीन को चार लोग विक्रय कर रहे है। जो अब तक करीब 6 से 7 करोड़ की संपत्ति को विक्रय कर चुके हैं। जिनको रोकना जरूरी है । तहसीलदार ने बताया इस संबंध में कमेटी गठित की गई है। टीम को अभी तक क्या साक्ष्य मिले क्या नहीं, यह तो पता नहीं। लेकिन अगर अहम सूत्रों की बात करें तो पता चला है की जफर अली खा की पढ़ाई मुस्लिम यूनिवर्सिटी अलीगढ़ में हुई थी। लगभग 1960 से पूर्व वह पाकिस्तान चले गए थे। उन्हें अपनी मातृभूमि से बेहद लगाव था। इसलिए वह प्रत्येक वर्ष भारत आते जाते थे। इतना ही नहीं भारत में लगाव की वजह से ही उन्होंने अपनी दोनों पुत्रियों की शादी भारत में ही की और अपने पुत्र की शादी भी कायमगंज के रिश्तेदारी में करने की उनकी आखरी इच्छा थी। उनकी संपत्ति को बेचा ना जाए। वल्कि उस जगह पर अस्पताल या स्कूल खोले जाए। जिससे उनके इलाके के लोगों को उसकी सुविधा मिल सके। जिनके वह हकदार है। लेकिन अभिलेखों में हेरफेर कर उनकी संपत्ति को बेचा जा रहा है। यह बात उनकी बेटी ने कही।
आइए जानते हैं जफर अली खान की पुत्री नाजिया अली खान से हुई वार्ता :-
मेरी पूरी ददिहाल जनपद फर्रुखाबाद कायमगंज में है। आज शायद मेरी जमीन जायदाद जो धोखाधड़ी करके बेची जा रही है। उनका कहना है कि मैं भारतीय हूं। मेरी शादी इंडिया में हुई है । मेरे वालिद का संबंध इंडिया से था । हालांकि इंतकाल के बाद शारीरिक या खून रिश्ते खत्म नहीं होते। मेरे दो भाई हैं । जो यूएसए की नागरिक है। मेरी बहनें मौजूद है। दूसरी बहन की शादी भी इंडिया में हुई है । मेरे वालिद की शादी भी इंडिया से हुई । लेकिन उनकी पाकिस्तान की नागरिकता है। वालिद का नाम जफर अली खान है। जो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़े हैं। अगर आपको उनका कोई रिकॉर्ड चाहिए तो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से मिल सकता है। मेरा तो खानदानी तौर पर पूरा संबंध कायमगंज में गाँव/ मोहल्ला याहियापुर है।अगर देखा जाए तो अपनी वालिद की पूरी ज्यादा की हकदार मैं हूं। मैं उनकी पुत्री जो मौजूद हूं। मेरे वालिद हर साल आया करते थे। कोरोना काल से उनकी आमद रुकी है। 2 साल पूर्व उनका कराची (पाकिस्तान) में इंतकाल हो गया। वह लगभग 91 वर्ष आयु के रहे हैं। वह इंडियन नागरिक थे और लगभग 1960 के करीब वह पाकिस्तान चले गए थे। मेरे पति का नाम ख्वाजा मोहम्मद खुशहाल है। मैं मुजफ्फरनगर में रहती हूं। लेकिन मैं अपनी बेटी के पास दिल्ली आती जाती रहती हूं। मेरे वालिद साहब छ:- छ: माह के लिए आते थे। और हर – बार कायमगंज आते- जाते थे। मेरे फादर ने 1980 में मुकदमे और संपत्ति की देखरेख व पैरोकारी के लिए पावर आफ एटर्नी दी थी। अन डिवाइडेड प्रॉपर्टी या मुश्तर्का प्रापर्टी के कारण देखने के लिए दी थी। उन्होंने संपत्ति को बेचने का कोई हक नहीं दिया था।यदि कोई दूर रहता है तो कुछ लोग दो नंबर का काम कर हेरफेर कर लेते हैं। यदि उनको संपत्ति या जायदाद बेचनी थी। तो उन्हें मेरे वालिद या हम लोगों से इजाजत लेनी चाहिए थी। पावर आफ एटर्नी कार्यालय तहसील में मौजूद होगा। मेरे फादर को इंडिया से हमेशा बहुत लगाव रहा है। क्योंकि वह उनकी मातृभूमि रही है। इसलिए उन्होंने अपनी दोनों बेटियों की शादी भारत में ही की और बेटे की शादी भी कायमगंज के रिलेटिव से ही की। संपत्ति की विरासत के लिए मैंने कोई आवेदन नहीं किया है। क्योंकि हमारे वालिद वगैराह बैठकर वार्ता करना चाह रहे थे। कि सम्पत्ति का निस्तारण कैसे किया जाए। कोरोना कॉल आ गया और उसके बाद हमारे वालिद की डेथ हो गई। वह संपत्ति बेचने के खिलाफ थे। वह अपनी संपत्ति का अच्छा उपयोग करना चाहते थे। जिससे उनके इलाके में स्कूल या अस्पताल बन सके। जिससे वहां के लोगों की भलाई हो सके। संपत्ति बेचने का यह कार्य वह लोग हमसे छिपाकर कर रहे है। शत्रु संपत्ति के असली मालिक स्वर्गीय खान की बेटी अपने वालिद की ख्वाइश के मुताबिक चाहती है कि धोखाधड़ी के साथ 420 करके जो लोग इस संपत्ति को बेचकर बर्बाद रहे हैं। उन्हें ऐसा करने से रोका जाना चाहिए और उनकी वालिद की आखिरी इच्छा के मुताबिक पूरी संपत्ति जनहित में अस्पताल या स्कूल के काम में लाकर इलाका के लोगों को सहूलियत दिलाई जानी चाहिए।
ब्यूरो चीफ जयपाल सिंह यादव दानिश खान
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