world news सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के विरुद्ध फिर शुरू किया विद्रोही गुटों ने हमला

Picsart 24 12 02 15 17 47 991

World news साभार : –

दिल्ली – ( द एंड टाइम्स न्यूज )
पिछले साल सात अक्तूबर को हमास के हमले के बाद इसराइल ने जो जंग शुरू की थी, वो अभी ख़त्म भी नहीं हुई है और सीरिया में एक और युद्ध शुरू हो गया है.
पिछले कुछ दिनों से सीरिया में जो कुछ भी हो रहा है, वो इस बात के सबूत हैं कि मध्य-पूर्व में युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है.2011 से सीरिया में एक दशक के युद्ध के बाद भी राष्ट्रपति बशर अल-असद का शासन कायम रहा था क्योंकि उन्होंने इसकी तैयारी की थी और अपने पिता से बहुत कुछ सीखा था.बशर अल-असद को अपनी सत्ता बचाने में कामयाबी इसलिए भी मिली थी क्योंकि उन्हें ताक़तवर सहयोगी ईरान, रूस और लेबनानी हिज़्बुल्लाह से मदद मिली थी.
इन सहयोगियों ने सीरिया में विद्रोही समूहों के ख़िलाफ़ बशर अल-असद की मदद की थी. सीरिया में विद्रोही समूह जिहादी अतिवादी इस्लामिक स्टेट से लेकर कई अन्य हथियारबंद समूह थे, जिन्हें अमेरिका और खाड़ी के अमीर शाही सरकारों से मदद मिल रही थी.अभी इसराइल से तनातनी के कारण ईरान की हालत कमज़ोर है. ज़ाहिर है कि इसराइल के साथ अमेरिका भी खड़ा है. ईरान का सहयोगी हिज़्बुल्लाह भी बशर अल-असद को बचाने के लिए अपने लड़ाकों को भेजता था लेकिन इसराइली हमले में हिज़्बुल्लाह भी ताक़त खो चुका है.रूस ने पिछले कुछ दिनों में बशर अल-असद के समर्थन में सीरिया में विद्रोही गुटों के ख़िलाफ़ हवाई हमला किया है लेकिन रूस की भी यूक्रेन से जंग के कारण सैन्य क्षमता पहले की तरह नहीं है. 2011 के बाद विद्रोही गुटों के साथ संघर्ष में सीरिया के कई शहर पूरी तरह से तबाह हो गए थे युद्ध का अंत नहीं सीरिया में युद्ध का अंत नहीं हुआ है. सीरिया में जो कुछ भी हो रहा था, वो मीडिया की सुर्खियों में नहीं था क्योंकि मध्य-पूर्व में और भी कई चीज़ें हो रही थीं, जो इन पर भारी पड़ रही थीं.एक वजह यह भी थी कि सीरिया में वहाँ तक पत्रकारों की पहुँच नहीं थी. सीरिया में उन जगहों पर युद्ध रुका हुआ था लेकिन कुछ भी अंतिम नहीं हुआ था. बशर अल-असद के पास 2011 के पहले सत्ता पर जो नियंत्रण था, उसे वह फिर से कभी हासिल नहीं कर पाए हैं.2011 अरब स्प्रिंग का साल था. सीरियाई जेलों में क़ैदी अब भी बंधकों की तरह रखे गए हैं. पिछले कुछ दिनों को छोड़ दें तो बशर अल-असद का नियंत्रण बड़े शहरों पर अब भी है. ये वो शहर हैं, जो सीरिया के चारों तरफ़ हैं और मुख्य राजमार्ग से जुड़े हुए हैं.अब विद्रोही समूहों के गठजोड़ का नेतृत्व हयात तहरीर अल-शम (एचटीसी) कर रहा है. इसका उभार इदलिब प्रांत से हुआ जो कि तुर्की से लगता है.अब यह प्रांत विद्रोही गुटों के नियंत्रण में है. एक सीनियर डिप्लोमैट ने मुझसे कहा, 27 नवंबर के बाद कुछ ही दिनों में सीरियाई सैनिकों को वहाँ से भागना पड़ा. दो दिन की लड़ाई के बाद विद्रोही समूहों ने अपने लड़ाकों की तस्वीरें पोस्ट करते हुए प्राचीन शहर एल्लपो पर नियंत्रण की घोषणा कर दी. 2012 से 2015 के बीच यहाँ सीरिया की सरकार के सैनिकों का भारी जमावड़ा था. तब यह शहर विद्रोही गुटों और सरकारी बलों के बीच बँट गया था.
सरकारी बलों के हटने के बाद ऐसा लग रहा है कि एल्लपो में शांति है. सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई एक तस्वीर में दिख रहा है कि यूनिफॉर्म में हथियारबंद विद्रोही लड़ाके एक फास्ट फूड आउटलेट पर फ्रायड चिकन के लिए लाइन में लगे हुए हैं.एटीएस की जड़ें अल-क़ायदा से जुड़ी हैं. हालांकि 2016 में यह समूह अलग हो गया था. 2016 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अलावा अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, तुर्की और ब्रिटेन ने एचटीएस को एक आतंकवादी समूह के रूप में चिह्नित किया था.हालांकि सीरियाई सरकार सभी विद्रोही गुटों को आतंकवादी समूह कहती है.इराक़ और सीरिया में एचटीएस नेता अबू मोहम्मद अल-जवलानी की पहचान लंबे समय से एक जिहादी नेता के रूप में रही है.हालांकि हाल के वर्षों में कट्टर जिहादी विचारधारा से जवलानी दूर हुए हैं ताकि इस समूह की अपील का दायरा बढ़ सके.इस समूह की रीब्रैंडिंग की कोशिश की गई है ताकि समर्थकों को लुभाया जा सके. यह समूह जिहादी भाषा और इस्लामिक संदर्भों से परहेज़ करता है. जिहादी मीडिया विश्लेषक मीना अल-लामी कहती हैं कि इस समूह की भाषा तटस्थ है. अतीत में जिहादियों ने जो किया, उससे एचटीएस दूरी रखने की कोशिश करता है और सीरियाई सरकार के ख़िलाफ़, मिलकर लड़ने की अपील करता है. सीरिया के लोग अतिवादी धार्मिक घटनाओं से ऊब गए हैं. 2011 के बाद सीरिया में लोकतंत्र के समर्थन में शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन को बल-पूर्वक दबा दिया गया था. इसके बाद ही विद्रोही गुटों का प्रभुत्व बढ़ा. ऐसे में ज़्यादातर सीरियाई या तो तटस्थ रहे या बेमन से सरकार के साथ हुए क्योंकि जिहादी विचारधारा वाले इस्लामिक स्टेट से डरे हुए थे.उत्तरी सीरिया में राजनीतिक विभाजन के बीच एटीएस आक्रामक हुआ था. पूर्वोत्तर सीरिया के ज़्यादातर इलाक़ों पर सीरियाई डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज (एसडीएफ़) का नियंत्रण था।
बशर अल-असद का क्या होगा?
एसडीएफ़ कुर्दों का समूह है और इसे अमेरिका का समर्थन हासिल था. अमेरिका के क़रीब 900 सैनिक इस इलाक़े में थे.यहाँ तुर्की बड़ा खिलाड़ी है और उसी के नियंत्रण में सीमाई इलाक़ा है. तुर्की ने यहाँ अपने सैनिकों की तैनाती की है और साथ में दूसरे समूहों को भी मदद करता है. इस्लामिक स्टेट के बचे हुए लड़ाके भी कभी-कभी सीरियाई रेगिस्तान से घात लगाकर हमले करते हैं.सीरिया से आ रही रही रिपोर्टों के मुताबिक़ विद्रोही गुटों ने अहम सैन्य आपूर्ति पर क़ब्ज़ा कर लिया है. विद्रोही गुट हामा की तरफ़ बढ़ रहे हैं और इनका अगला निशाना दमिश्क है.बेशक बशर अल-असद की सरकार और उसके सहयोगी हवाई हमले के ज़रिए जवाबी कार्रवाई की योजना पर काम कर रहे हैं.विद्रोही गुटों के पास एयर फोर्स नहीं है. हालांकि वो ड्रोन हमले कर सकते हैं और इसी का इस्तेमाल सरकार के एक ख़ुफ़िया अधिकारी को मारने के लिए किया था.सीरिया में फिर से जंग की शुरुआत दुनिया को सतर्क करने वाली है.सीरिया में संयुक्त राष्ट्र के राजदूत गेइर पेडर्सन ने एक बयान जारी कर कहा, सीरिया में जो कुछ भी हो रहा है, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के साथ वहाँ के नागरिकों के लिए ख़तरनाक है. उन्होंने कहा कि सैन्य टकराव के ज़रिए सीरिया में समस्याओं का समाधान संभव नहीं है. सीरिया का भविष्य निष्पक्ष चुनाव और एक नए संविधान में निहित है. इसका मतलब यह है कि असद और उनका परिवार सीरिया को सालों से जिस मनमानी तरीक़े से हैंडल कर रहा है, उसे रोकना होगा.सीरिया की लड़ाई में पाँच लाख से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है.लेकिन असद सत्ता से बाहर हो जाएंगे, यह कहना जल्दबाज़ी है. सीरिया के लोग असद को जिहादियों की तुलना में अच्छा विकल्प मानते हैं. यही असद की ताक़त है. लेकिन अन्य असद विरोधी गुटों का उभार होता है तो सरकार ख़तरे में पड़ सकती है. ।

ब्यूरो रिपोर्ट

FARRUKHABAD NEWS UTTAR PRADESH

Farrukhabad news सावधान! इस गली में बिछा है ‘मौत का जाल’, शिकायत के बाद भी नहीं जागा विभाग, एक साल में दूसरी गौवंश की मौत

Farrukhabad news –अंबेडकर नगर में करंट की चपेट में आने से सांड की तड़प-तड़प कर[...]

FARRUKHABAD NEWS KAIMGANJ NEWS

KAIMGANJ NEWS झोलाछाप के फेर में उजड़ गई गोद: चार दिन के बुखार ने ली 14 वर्षीय अनीता की जान, सीएचसी पहुँचते ही पसरा मातम

KAIMGANJ NEWS कायमगंज (फर्रुखाबाद)। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद के कायमगंज में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और[...]

FARRUKHABAD NEWS KAIMGANJ NEWS

KAIMGANJ NEWS खाकी का ‘एक्शन’: विवाहिता शिवानी के कत्ल का मुख्य आरोपी पति दबोचा, हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद

KAIMGANJ NEWS कायमगंज (फर्रुखाबाद)। प्रेमनगर में हुई विवाहिता शिवानी की नृशंस हत्या के मामले में[...]

FARRUKHABAD NEWS KAIMGANJ NEWS

KAIMGANJ NEWS खाकी का ‘ऑपरेशन राज’: 40 कैमरों का जाल, 72 घंटे की जद्दोजहद और स्टेशन पर मिल गया ‘जिगर का टुकड़ा’

KAIMGANJ NEWS कायमगंज (फर्रुखाबाद)। कहते हैं कि अगर पुलिस ठान ले, तो पाताल से भी[...]

FARRUKHABAD NEWS KAIMGANJ NEWS

KAIMGANJ NEWS अबीर-गुलाल की खुशबू में घुला किसान एकता का रंग, होली मिलन में गूंजे भाईचारे के स्वर

KAIMGANJ NEWS –भारतीय किसान मजदूर यूनियन के समारोह में किसानों ने गले मिलकर दी बधाई,[...]

FARRUKHABAD NEWS SHAMSHABAD NEWS

Farrukhabad news DM का ‘सडन सरप्राइज’: शमसाबाद थाने में हड़कंप, फाइलों से मालखाने तक की कड़ी जांच

Farrukhabad news – हर पटल का निरीक्षण कर मिलीं खामियों पर कड़े तेवर के साथ[...]

FARRUKHABAD NEWS KAIMGANJ NEWS

KAIMGANJ NEWS घने कोहरे की चादर में लिपटा कायमगंज क्षेत्र, सड़क और रेल यातायात पर पड़ा असर

KAIMGANJ NEWS – घना कोहरा देख लोगों ने कहा कि आज तो ऐशा लग रहा[...]

World News

world news लेबनान में इस्राइल का ‘खौफनाक’ वार: आसमान से बरसी रसायनिक आग, हड्डियों तक को गला देने वाला केमिकल इस्तेमाल!

World news–​ह्यूमन राइट्स वॉच का सनसनीखेज दावा: रिहायशी इलाकों को बनाया निशाना; अंतरराष्ट्रीय कानूनों की[...]

You cannot copy content of this page

ताजा खबर के लिए सब्सक्राइब करें No Yes