KAIMGANJ NEWS –विभीषण की शरणागति से लेकर कुंभकर्ण, मेघनाथ और अहिरावण वध तक सजीव मंचन ने बांधा समां, संजीवनी बूटी लेकर लौटे हनुमान तो गूंज उठा पंडाल
कायमगंज, फर्रुखाबाद।
नगर के सीपी ग्राउंड में चल रही रामलीला के 14वें दिन आस्था, भक्ति, वीरता और भावनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने दर्शकों को देर रात तक मंच से बांधे रखा। कलाकारों ने रामायण के युद्ध प्रसंगों को जीवंत अंदाज में प्रस्तुत कर धर्म और अधर्म के संघर्ष, भाई के प्रति प्रेम, प्रभु के प्रति समर्पण और अहंकार के विनाश का संदेश दिया। रावण-विभीषण संवाद से शुरू हुए मंचन में लक्ष्मण की मूर्छा, हनुमान जी का संजीवनी लेकर आना तथा कुंभकर्ण, मेघनाथ और अहिरावण के अंत तक के दृश्यों ने रामलीला को यादगार बना दिया।
विभीषण के अपमान से शुरू हुआ घटनाक्रम, श्रीराम की शरण में पहुंचे लंकापति के भाई
रामलीला के मंच पर उस समय घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया, जब लंकापति रावण और उसके भाई विभीषण के बीच मतभेद का दृश्य प्रस्तुत किया गया। विभीषण ने रावण को अनुचित मार्ग छोड़कर धर्म का साथ देने की सलाह दी, लेकिन सत्ता और अहंकार में डूबे रावण ने उनकी बात मानने के बजाय उन्हें अपमानित कर दिया। क्रोध में आकर रावण ने विभीषण को लात मारकर लंका से बाहर निकाल दिया।
इसके बाद विभीषण ने भगवान श्रीराम की शरण ग्रहण की। कलाकारों ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि सत्य और धर्म का मार्ग अपनाने वाले व्यक्ति को परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए। रावण के राजमहल को छोड़कर श्रीराम के पास पहुंचे विभीषण का दृश्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा। मंचन ने यह संदेश दिया कि व्यक्ति की पहचान उसके पद और परिवार से नहीं, बल्कि उसके विचारों और कर्मों से होती है।
मेघनाथ के ब्रह्मबाण से मूर्छित हुए लक्ष्मण, श्रीराम के विलाप ने किया भावुक
लंका के मैदान में राम और रावण की सेनाओं के बीच युद्ध का दृश्य आगे बढ़ा तो मेघनाथ ने अपने पराक्रम का प्रदर्शन करते हुए लक्ष्मण पर ब्रह्मबाण चला दिया। बाण लगते ही लक्ष्मण मूर्छित होकर रणभूमि में गिर पड़े। अपने प्रिय अनुज को अचेत अवस्था में देखकर भगवान श्रीराम व्याकुल हो उठे।
मंच पर श्रीराम के विलाप और लक्ष्मण के प्रति उनके अगाध प्रेम का मार्मिक चित्रण किया गया। भाई को संकट में देखकर श्रीराम की पीड़ा का दृश्य इतना भावपूर्ण रहा कि रामलीला देखने पहुंचे अनेक दर्शक भावुक हो गए। इस प्रसंग ने भाई-भाई के रिश्ते में प्रेम, त्याग और समर्पण की महत्ता को उजागर किया।
संकटमोचक हनुमान ने फिर दिखाई भक्ति और पराक्रम की मिसाल
लक्ष्मण की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वैद्य सुषेण को बुलाने की आवश्यकता पड़ी। इसके बाद पवनपुत्र हनुमान जी लंका से वैद्य सुषेण को लेकर आए। वैद्य ने लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने का उपाय बताया। प्रभु श्रीराम की चिंता दूर करने और लक्ष्मण को नया जीवन दिलाने के उद्देश्य से हनुमान जी द्रोणगिरि पर्वत की ओर रवाना हुए।
रामलीला के मंच पर संजीवनी प्रसंग का प्रभावशाली चित्रण किया गया। हनुमान जी के पर्वत लेकर लौटने और लक्ष्मण के स्वस्थ होने के दृश्य के दौरान दर्शकों में उत्साह देखने को मिला। लक्ष्मण के दोबारा युद्ध के लिए तैयार होने के साथ ही रामभक्तों में प्रसन्नता का माहौल बन गया। इस प्रसंग ने भक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और निस्वार्थ सेवा की भावना को प्रमुखता से सामने रखा।
कुंभकर्ण, मेघनाथ और अहिरावण का अंत, युद्ध प्रसंगों ने बढ़ाया रोमांच
रात्रिकालीन मंचन में लंका युद्ध के कई प्रमुख दृश्यों को प्रस्तुत किया गया। विशालकाय कुंभकर्ण के युद्ध में उतरने से लेकर उसके वध तक के घटनाक्रम ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाई। इसके बाद मेघनाथ वध का प्रसंग मंचित हुआ, जिसमें बुराई की शक्तियों के पराभव को दर्शाया गया।
रामलीला में अहिरावण वध का प्रसंग भी आकर्षण का केंद्र रहा। कलाकारों ने युद्ध के दृश्यों, संवादों और अभिनय के माध्यम से रामायण की घटनाओं को दर्शकों के सामने साकार करने का प्रयास किया। एक के बाद एक प्रस्तुत किए गए प्रसंगों ने कार्यक्रम में रोमांच बनाए रखा और पंडाल में मौजूद श्रद्धालु पूरी तन्मयता से मंचन देखते रहे।
धर्म, मर्यादा और सत्य की विजय का दिया संदेश
सीपी ग्राउंड में आयोजित रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि इसके जरिए दर्शकों को जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश भी मिले। विभीषण की शरणागति ने सत्य का साथ देने की प्रेरणा दी, लक्ष्मण की मूर्छा और श्रीराम के विलाप ने पारिवारिक प्रेम की गहराई को दर्शाया, जबकि हनुमान जी के संजीवनी लाने के प्रसंग ने सेवा और समर्पण का महत्व समझाया।
रामलीला के सभी प्रमुख दृश्यों के माध्यम से यह संदेश उभरकर सामने आया कि अहंकार और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य, धर्म और मर्यादा की ही होती है। नगर में आयोजित इस धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम ने रामायण की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी
रामलीला के 14वें दिन आयोजित कार्यक्रम में सत्य प्रकाश अग्रवाल, संजय बंसल, अमित सेठ, संजीव शाक्य, पीयूष गंगवार, मनोज तिवारी और लखपति सक्सेना सहित अनेक लोग मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने रामलीला के मंचन का आनंद लिया और धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से प्रस्तुत संदेशों को सराहा।
ब्यूरो चीफ जयपाल सिंह यादव दानिश खान

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