– आलू की मंदी की मार से वेहाल किसान पर वर्षा ने फिर ढाया कहर
– बरसात से खुली कायमगंज नगर पालिका के विकास की पोल, गलियों तथा सड़कों पर भरा कचरा युक्त गंदा पानी
कायमगंज/ फर्रुखाबाद 21 मार्च 2023 सक्रिय हुए प्री- मानसून के कारण पिछले दो-तीन दिनों से रह- रह कर आकाश से पानी की बौछारें जमीन पर गिरने लगी है। तेज बारिष व हवाओं के झोंके से खेतों में खड़ी फसलें तबाह हो रही हैं। गेहूं के खेत ऐसे लग रहे हैं मानो इस फसल पर किसी ने पाटा चला दिया हो। गेहूं की फसल टूट- टूट कर जमीन पर पसर गई है।

इस गिरी हुई फसल पर बारिष का पानी गिरने से उस की निचली परत के साथ ही पत्तियां तथा जड़े सडने के आसार बनते जा रहे हैं। वही उसकी वालियां भी फंगस लगने से गलने लगी जिसके कारण दाने तबाह हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में पैदावार बुरी तरह प्रभावित होगी। ठीक यही हाल रवी की अन्य फसलों का भी हो रहा है। इसके अलावा कायमगंज क्षेत्र जहां एटा जनपद के समीपवर्ती वाले ग्रामों से लेकर कायमगंज के पास बसे गांवअताईपुर कटरा, मऊरशीदाबाद, मुडौल, जौंरा कादर दादपुर सराय, पुरौरी, कंपिल तथा कंपिल क्षेत्र के अन्य गांव एवं तराई क्षेत्र के ग्राम कुआं खेड़ा, अहमदगंज, भकुसी, विकासखंड शमशाबाद क्षेत्र के गांव सहित पूरे तहसील क्षेत्र कायमगंज में बसे अन्य ग्रामों में अधिकांश किसान तंबाकू की फसल उत्पादक है। इतने बड़े भू-भाग पर खड़ी तंबाकू की फसल भी वर्षा के कारण बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है। तंबाकू के पौधे की चौड़ी पत्तियों में छेद ही छेद नजर आने लगे हैं। किसान परेशान है। उसका कहना है कि अभी आलू के बेहद गिरे हुए भाव से मंदी की मार झेल भी नहीं पाए थे, कि तब तक बेमौसम बरसा ने उन्हें बर्बाद कर दिया है। मेहनतकश किसान का कहना है कि महंगे खाद बीज कृषि उपकरण सिंचाई के साधन महंगा डीजल सब कुछ खुद के पास ना होने पर इसकी व्यवस्था बैंक अथवा अन्य ऋण दाई संस्थाओं या फिर निजी तौर पर कर्ज लेकर करनी पड़ती है। अब तो मौसम की मार ने उनकी उम्मीदों पर ही पानी फेर दिया है। भला ऐसे में क्या उम्मीद की जा सकती है की लगाई गई लागत के साथ ही उसकी मेहनत भी उसे वापस मिल पाएगी। ऐसी स्थिति में अन्नदाता किसान अपने भाग्य को कोसता हुआ केवल ईश्वर के सहारे ही भविष्य को देख रहा है।

इनसैट:- बर्षा के पानी से नगर पालिका कायमगंज के विकास की खुली पोल
कायमगंज, 21 मार्च
पड़ोस के दर्जनों जनपदों में नगर पालिका परिषद कायमगंज कुछ साल पहले तक विकास के नाम पर सीना ताने खड़ी थी। इसीलिए इसे आदर्श नगर पालिका का दर्जा हासिल हुआ था। लेकिन वक्त ने करवट बदला आरक्षण व्यवस्था के चलते पिछले कार्यकाल में 10 साल पूर्व की हकीकत बदल गई। नगरपालिका की कमान भी किन्हीं अन्य जनप्रतिनिधियों के हाथ में पहुंची। लेकिन नगर वासियों को उम्मीद थी कि उनकी नगरपालिका वैसी ही चमकती दमकती रहेगी। जिसकी वजह से उसे आदर्श नगर पालिका का रुतबा प्राप्त हुआ है। लेकिन ऐसा शायद नहीं हो सका। काम हुआ , सड़के बनी, गलियां बनी, नाले और नालियों पर भी कार्य चलता रहा। लेकिन काम केवल काम भर कहने के लिए ही संभवत हुआ। सरकारी धन का खर्चा तो हुआ। लेकिन उस कार्य से संतोषजनक परिणाम मिलता दिखाई नहीं दिया। जलापूर्ति, जल निकासी की व्यवस्था भी सही नहीं रही।सच यही है, भले ही कोई सत्य पर पर्दा डालने के लिए दलील कुछ भी दे। लेकिन हकीकत साफ दिखाई दे रही है। आज रात से हुई बरसा ने विकास की पोल खोल कर रख दी। नगर के मुख्य स्थान श्यामा गेट पर नालियां चोक होती दिखाई दी। नालियों का पानी गलियों और सड़कों पर भर गया। ठीक ऐसी ही स्थिति भूसा मंडी वाले तिराहे पर गंगादरवाजा, पुरानी गल्ला मंडी, लाल कुआं ,पटवन गली, नौनियमगंज आदि स्थानों पर बजबजाती नालियों का कचरा बदबू फैलाता हुआ सड़कों पर आकर बिखर गया। तेज बर्षा के पानी का बहाव नालियों से ना हो पाने की वजह से पूरे का पूरा मलवा गलियों और सड़कों पर पानी के साथ आकर भर गया। इसी गंदगी और कीचड़ भरे रास्तों से बाजार आने वाले क्षेत्रीय ग्रामीणों को, साथ ही दूर दराज से व्यापार के लिए यहां आने वाले व्यापारियों को एवं कायमगंज नगर के लगभग हर व्यक्ति को इसी कीचड़ से होकर निकलना पड़ रहा है। हालत यह है, फिर भी गत 5 साल से करोड़ों रुपए का आया बजट विकास के नाम पर खर्च किया जाता रहा। इतनी भारी-भरकम राजकीय धनराशि बर्बाद हो गई। लेकिन नगरवासियों को नारकीय जीवन जैसी स्थिति से होकर यहां की सड़कों व गलियों से निकलने को मजबूर होना पड रहा है। जैसी अन्य अनियमितताएं भी नगर पालिका परिषद कायमगंज में होती रही। ऐसा नहीं कि इसके विरुद्ध निर्वाचित सभासदों ने विरोध दर्ज कराते हुए आवाज बुलंद ना की हो। एक बार नहीं, दर्जनों बार सक्रिय जनसेवी सभासदों ने धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए विकास के नाम पर धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए बुलंद आवाज के साथ आंदोलन किया, धरना भी दिया। बैठकों में नगर पालिका प्रशासन को चेतावनी भी दी। लेकिन सब कुछ अनसुना किया जाता रहा। शायद उसी का परिणाम है कि आज बेमौसम की थोड़ी ही वर्षा में नगर की गलियां और सड़कें नरक में तब्दील होती दिखाई देने लगी हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट= जयपाल सिंह यादव, दानिश खान
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