Farrukhabad News:-डॉ राम मनोहर लोहिया की कर्मभूमि फर्रुखाबाद से था नेताजी मुलायम सिंह यादव का विशेष लगाव

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– जिला फर्रुखाबाद को इन दोनों समाजवाद के महानायकों ने जनहित के लिए ऐसा किया जैसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता
फर्रुखाबाद 13 अक्टूबर 2022
ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ चल रहे आंदोलन में डॉ राम मनोहर लोहिया कांग्रेस के शीर्ष में से एक थे। बे जंगे आजादी के समय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांत को मानकर अंग्रेजो के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे। जब देश आजाद हुआ तो बदलते समय के अनुसार विश्व के जाने-माने अर्थशास्त्री लोहिया जी ने अनुभव किया कि भारत जैसे विशाल सर्वधर्म समभाव वाले देश को समाजवाद की अति आवश्यकता है। उन्होंने समाजवाद की विचारधारा से देश को फलीभूत होने का सपना देखते हुए समाजवादी आंदोलन की शुरुआत कर दी, और वे कांग्रेस से अलग हो गए।

डॉक्टर लोहिया का त्याग था। यदि वे चाहते तो पंडित जवाहरलाल नेहरू मंत्रिमंडल में या फिर अन्य किसी उच्च संवैधानिक पद को प्राप्त कर सकते थे। लेकिन समाजवादी विचारधारा के प्रणेताने ऐसा नहीं किया। जिस समय लोहिया जी ने केंद्र सरकार के विरुद्ध नहर रेट आंदोलन शुरू किया उस समय नेताजी मुलायम सिंह यादव की उम्र बमुश्किल उनके पारिवारिक सूत्रों के अनुसार 14 या 15 वर्ष की होगी और बे लोहिया आंदोलन से प्रभावित होकर इतनी कम उम्र में ही आंदोलन से जुड़ गए। इतना ही नहीं इस उम्र में उन्होंने बेखौफ हो जेल यात्रा भी की। यहीं से नेताजी का जुड़ाव समाजवादी विचारधारा से अटूट रिश्ते की तरह जुड़ गया। और बे अपने छात्र जीवन से लेकर शिक्षक जीवन तक इसी विचारधारा के वाहक बन गए। पहली बार इतनी कम उम्र में विधायक बनकर उन्होंने जो काम विपक्ष में रहते हुए।

अपने क्षेत्र की जनता के लिए करके दिखाए। आज भी उदाहरण के रूप में देखे जाते हैं। आपातकाल के बाद कैबिनेट स्तर के प्रदेश में सहकारिता मंत्री बनकर नेता जी ने सहकारी समितियों में किसानों के लिए ऐसे नियम बनाए। जिनसे उनका शोषण रुका। साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर साधन सहकारी समितियों के भवन बनवाकर गांव पर ही खाद बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए उन्होंने ब्याज के रूप में बेतहाशा वसूली जा रही ब्याज की दर को नियंत्रित करके गरीबों और किसानों को बहुत बड़ा फायदा पहुंचाया ।अपने मुख्यमंत्री काल में उन्होंने प्रदेश की नदियों पर इतने पुल बनवाए जिससे आवागमन सरल हुआ व्यापार की गति जैसे अनेक काम जिनमें चुंगी माफी, पढ़ाई, दवाई, सिंचाई मुफ्त करके उन्होंने वास्तव में नेता होने का परिचय देते हुए यह गौरव हासिल किया था। उनके चिर निद्रा में चले जाने के बाद अब केवल किए गए कार्यों की स्मृतियां ही शेष रह गई हैं। जो आने वाली पीढ़ी को समाजवाद का युगों तक संदेश देती रहेगीं। उनके दुनिया छोड़कर चले जाने से हर एक पार्टी प्रति एक दल का नेता उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देकर उनके परिवार के साथ संवेदनाएं व्यक्त कर रहा है। फिर भी कुछ ट्रोलर अपनी मानसिकता का परिचय देकर जिस तरह कमेंट कर रहे हैं ।उस पर भी आम आदमी इन्हीं गलत कमेंट करने वालों को बताने ना योग्य शब्दों का प्रयोग कर कोस रहा है।

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जनसभा को संबोधित करते मुलायम सिंह यादव 

समाजवादी विचारधारा के नायकों में जयप्रकाश नारायण ,डॉ राम मनोहर लोहिया जैसे और भी कई नायकों के नाम शामिल हैं। इन सभी ने समाजवाद को राष्ट्रहित में बता कर आजीवन उसी का अनुसरण किया। इसी पाठशाला के नेताजी मुलायम सिंह ऐसे राजनेता हुए उन्होंने तथा डॉ राम मनोहर लोहिया ने जनपद फर्रुखाबाद को ऐसा कुछ दिया। जिसका उदाहरण जन उपयोग के हिसाब से शायद जिले में दूसरा नहीं मिलता। बताया जा रहा है कि फर्रुखाबाद को अपनी कर्मभूमि मानकर डॉ राम मनोहर लोहिया ने यहीं से लोकसभा का चुनाव लड़कर कांग्रेस के दिग्गज प्रत्याशी केसकर जी को हराया था। उस समय फर्रुखाबाद से सीधे सड़क मार्ग द्वारा जाने के लिए गंगा नदी के कारण कोई अच्छा रास्ता नहीं था। जिसके अभाव में आवागमन तथा व्यापारिक गतिविधियां उत्तर छोर में बसे जनपदों से नहीं हो पा रही थी। इस परेशानी को देखकर डॉ राम मनोहर लोहिया ने वादा किया था। कि बे हर हाल में पावन गंगा तट घटियाघाट पर गंगा सेतु का निर्माण कराएंगे। उन्होंने त्याग की प्रतिमूर्ति देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से कहकर अपने वादे को पूरा करते हुए घटिया घाट पर गंगा सेतु निर्माण का मार्ग प्रशस्त करा दिया। यहां पर जब गंगा पुल बनकर तैयार हुआ तब तक समाजवाद के स्तंभ महानायक डॉ राम मनोहर लोहिया का परिर्निवाण हो गया। किंतु वे जनपद के लिए यह पुल विकास की सौगात के रूप में सौंप गए।
= ठीक इसी तरह समाजवाद के नायकों में एक युग जिसका अवसान नेताजी मुलायम सिंह के दुनिया छोड़ने से हुआ। नेताजी मुलायम सिंह यादव जब तमाम संघर्षों के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

तो उन्होंने लोहिया की कर्मभूमि जनपद फर्रुखाबाद में देखा कि उच्च मानकों वाला कोई स्वास्थ्य रक्षक अस्पताल इस जिले में नहीं है। नेताजी मुलायम सिंह ने स्वयं फर्रुखाबाद के आवास विकास ग्राउंड पर आकर पूरी तैयारी के साथ उच्च स्वास्थ्य मानक सेवाओं का डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल यहां बनवाने की घोषणा करते हुए । अस्पताल का शिलान्यास किया था। इतना ही नहीं, इतने बड़े अस्पताल निर्माण के लिए नेताजी मुलायम सिंह ने बजट की व्यवस्था भी एस्टीमेट के अनुसार अग्रिम करवा दी थी। यह अस्पताल पड़ोसी जनपदों के अस्पतालों की तुलना में आज भी जन सामान्य को स्वास्थ्य सेवाएं देकर हर रोज यह साबित कर रहा है कि नेताजी मुलायम सिंह का दिल कितना बड़ा था ।

उन्होंने फर्रुखाबाद को डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल की सौगात देकर हमेशा के लिए गरीबों मध्यमवर्गीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए वास्तव में एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया । नेताजी मुलायम सिंह डॉ राम मनोहर लोहिया के चुनाव प्रचार में आए थे ।उसी समय से उन्हें फर्रुखाबाद से विशेष लगाव हो गया था। वे उस समय लोहिया जी के प्रधान चुनाव कार्यालय फर्रुखाबाद में श्यामा प्रसाद गुप्ता के यहां ठहरा करते थे। और इसके बाद भी यहां कई बार आए और हर बार जिले को कुछ न कुछ देकर ही गए। इसके अलावा उनका कायमगंज से भी विशेष स्नेह रहा। यहां उनके खास समर्थक रहे पूर्व विधायक तथा पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री मोहम्मद अनवर खाँ बहुत निकट थे ।उनके आवास पर भी कई बार नेताजी आए। जब मोहम्मद अनवर खां का निधन हुआ। तो उस दिन भी शोक संवेदना व्यक्त करने अपनी तमाम व्यस्तताओं के बीच वे मरहूम मोहम्मद अनवर खां के आवास ग्राम पिताैरा आए थे। जहां उन्होंने मरहूम अनवार खां की कब्र पर अपने हाथों से मिट्टी डालकर शोक व्यक्त किया था। ऐसे ऐसा था नेताजी का व्यक्तित्व एवं सरल स्वभाव जो आजीवन किसानों मजदूरों गरीबों उपेक्षित तथा शोषित के हितों में काम करते हुए पूरा हुआ। ऐसे नेता को पूरा राष्ट्र ही नहीं तमाम अन्य देशों से भी श्रद्धा व्यक्त की जा रही है । युगों तक समाजवाद की अमिट छाप के साथ याद किए- जाएंगे-समाजवाद के महानायक नेताजी मुलायम सिंह यादव।

रिपोर्ट जयपाल सिंह यादव,दानिश खान

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