कायमगंज/ फर्रुखाबाद 23 जून 2022
पर्यावरण की शुद्धता के लिए विशालकाय हरे पेड़ों का होना आवश्यक बताया जा रहा है। यह बात आज नहीं प्राचीन काल से कही और मानी जा रही है। कहा जाता है कि जब आज की तरह आने-जाने के उपयुक्त साधन नहीं थे। उस समय इन्हीं विशालकाय हरे भरे पेड़ पौधों से सुसज्जित बगीचों तथा घने पेड़ों की छाया में पथिक विश्राम करके अपनी थकान दूर कर लिया करते थे। इतना ही नहीं जलाने के लिए लकड़ी, खाने के लिए फल और सांस लेने के लिए शुद्ध हवा इन्हीं हरे भरे पेड़ों से मनुष्य तथा अन्य जीव धारियों को मिलती रही है। आज धन के लालच में धरा का श्रृंगार कहे जाने वाले इन हरे भरे पेड़ों को माफिया ,वन विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से लगातार काटकर उसका श्रंगार उजाडते जा रहे हैं। हरे भरे पेड़ पौधों से हमारी धरती आच्छादित रहे। जिससे पर्यावरण की शुद्धता बनी रहे । इस आशय से सरकार प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का बजट वृक्षारोपण के काम में खर्च करती है। वृक्षारोपण होता है। लेकिन उसमें कितने पौधे जीवित रहते हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है। लगाए गए पौधों में से अधिकांश पौधे पानी तथा देखभाल के अभाव में समय से पहले ही सूख जाते हैं और इस तरह वृक्षारोपण का फर्जी आंकड़ा बनाकर केवल कागजों पर खाना पूरी करके शासन को भेज दिया जाता है। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत होती है । खैर जो भी हो नए पौधे भले ही भ्रष्टाचार तथा लापरवाही की भेंट चढ़ कर फलने -फूलने से पहले ही समाप्त हो जाएं। यह अलग बात है, किंतु वह विशालकाय प्रतिबंधित हरे पेड़ जो पूरी तरह फल फूल रहे हैं। उन्हें वन विभाग की मिलीभगत के चलते लगातार लकड़ी माफिया काटकर आरा मशीनों पर ला रहे हैं। जिसका ताजा उदाहरण आज उस समय देखने को मिला जब वन विभाग के रेंजर कार्यालय कायमगंज तथा कोतवाली कायमगंज दोनों से ही बमुश्किल आधा किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित गांव घसिया चिलौली में लगी लकड़ी चिरान की आरा मशीन पर प्रतिबंधित हरे आम के पेड़ की लकड़ी लादकर ट्रैक्टर ट्रॉली लगातार आ रही हैं। यदि क्षेत्र मेंआम आदि हरे पेड़ों का अवैध कटान नहीं हो रहा है, तो फिर यह लकड़ी कहां से लाई जा रही है । यह काम इतना छुप कर भी नहीं किया जा सकता की सड़क मार्ग से वन विभाग तथा पुलिस इन्हें आता हुआ भी ना देख पाती हो, वैसे बहाना चाहे कुछ भी हो लेकिन इतना तो सत्य है की वन विभाग के अधिकारियों की धनलोलुप्ता ही इन विशालकाय हरे भरे आम आदि पेड़ों पर आरे चलवाने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। भले ही वन विभाग के अधिकारी कुछ भी बहाना कर जिम्मेदारी से अपना पल्लू झाड़ने का प्रयास करें।
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