KAIMGANJ NEWS भरत मिलाप की शाम कविताओं के नाम, हास्य-व्यंग्य और वीर रस ने बांधा समां

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KAIMGANJ NEWS –सीपी गेस्ट हाउस में देर रात तक गूंजती रहीं तालियां, कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को किया भावविभोर

देशभर से जुटे नामचीन कवियों ने शब्दों से सजाई साहित्य की महफिल, किसी ने व्यवस्था पर किया प्रहार तो किसी ने हास्य से गुदगुदाया

कायमगंज/फर्रुखाबाद। भरत मिलाप के पावन अवसर पर कायमगंज में साहित्य, संस्कृति और काव्य की ऐसी शानदार महफिल सजी, जिसमें देर रात तक श्रोता कविताओं के रस में डूबे रहे। भरत मिलाप समिति के सौजन्य से सीपी गेस्ट हाउस में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न शहरों से पहुंचे प्रतिष्ठित कवियों और कवयित्रियों ने अपनी सशक्त रचनाओं से ऐसा समां बांधा कि सभागार बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कहीं हास्य-व्यंग्य के तीर चले, कहीं प्रेम और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति ने दिल छुआ, तो कहीं वीर रस की कविताओं ने श्रोताओं में राष्ट्रप्रेम का जज्बा भर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद प्रतापगढ़ से आईं अंतरराष्ट्रीय कवयित्री साक्षी तिवारी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर साहित्यिक आयोजन को भक्तिमय वातावरण प्रदान किया। मंच पर कवियों का आगमन होते ही श्रोताओं में उत्साह दिखाई देने लगा। जैसे-जैसे कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं, वैसे-वैसे महफिल का रंग और गहरा होता गया।

शशि श्रेया के व्यंग्य ने व्यवस्था पर उठाए सवाल

लखनऊ से आईं कवयित्री शशि श्रेया ने अपनी धारदार रचना के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर चोट की। उनकी पंक्तियों ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। सामाजिक व्यवस्था की विडंबनाओं को शब्दों में पिरोते हुए उन्होंने खूब तालियां बटोरीं। उनकी प्रस्तुति ने साबित किया कि कविता केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का सशक्त जरिया भी है।

साक्षी तिवारी की शायरी ने जीता दिल

प्रतापगढ़ की कवयित्री साक्षी तिवारी ने प्रेम, आत्मसम्मान और मन की भावनाओं को अपनी शायरी में खूबसूरती से पिरोया। उनकी पंक्तियां—

“यूँ ख़्वाबों में आवारगी चल रही है,
इन पैरों में बेचारगी चल रही है।
ज़रूरत पड़ी तो मना लूँगी तुझको,
अभी ख़ुद से नाराज़गी चल रही है।”

ने श्रोताओं को भावनाओं की एक अलग दुनिया में पहुंचा दिया। उनकी प्रभावशाली अदायगी और शब्दों की खूबसूरती पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

राजकिशोर की कविता में दिखी समाज की पीड़ा

ग्वालियर से पहुंचे राष्ट्रीय कवि राजकिशोर ने अपनी रचनाओं के जरिए सामाजिक परिस्थितियों और आम आदमी की परेशानियों को स्वर दिया। उन्होंने पढ़ा—

“होंठ नदी के सूख रहे हैं, कुआँ भी प्यासा है।
हर चेहरे पर छाई उदासी और निराशा है।”

इन पंक्तियों में छिपी पीड़ा और व्यवस्था पर किए गए कटाक्ष ने श्रोताओं को गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित किया। उनकी कविता ने सभागार में मौजूद लोगों को समाज की वास्तविक चुनौतियों से रूबरू कराया।

देवेश दीक्षित की शायरी ने बिखेरे अदब के रंग

कायमगंज के स्थानीय कवि एवं शायर देवेश दीक्षित ने अपनी शायरी से महफिल में अलग ही रंग जमा दिया। उन्होंने सुनाया—

“दिन में भी महताब देखती रहती हैं।
आँखें क्या-क्या ख़्वाब देखती रहती हैं।”

उनकी पंक्तियों में कल्पना, एहसास और शायरी की नजाकत का सुंदर संगम देखने को मिला। स्थानीय प्रतिभा की इस प्रभावशाली प्रस्तुति को साहित्य प्रेमियों ने खूब सराहा। कार्यक्रम के प्रारंभिक संचालन की जिम्मेदारी भी देवेश दीक्षित ने निभाई।

भरत के त्याग और राम के प्रति समर्पण ने किया भावुक

सीपी स्कूल के प्रधानाचार्य योगेश तिवारी के मुक्तकों ने श्रोताओं को भगवान राम और भरत के आदर्शों की याद दिलाई। उन्होंने भरत के त्याग, भाई के प्रति प्रेम और राजसी वैभव से विरक्ति का चित्रण करते हुए सुनाया—

“न मरुथल अच्छा लगता था, न बगिया अच्छी लगती थी।
न तो कभी वो सरयू जैसी नदिया अच्छी लगती थी।
वैभव के कोई भी साधन कहाँ भरत को भाते थे।
बिना राम के राजमहल से कुटिया अच्छी लगती थी।”

इन पंक्तियों ने भरत मिलाप के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को काव्य के माध्यम से जीवंत कर दिया। भगवान राम के प्रति भरत के समर्पण और त्याग की भावना को सुनकर श्रोताओं ने मुक्तक की खूब सराहना की।

वीर रस ने जगाया राष्ट्रप्रेम, हास्य कवि ने लगाए ठहाके

मैनपुरी से आए वीर रस के चर्चित कवि मनोज चौहान ने अपनी ओजपूर्ण कविताओं से वातावरण में देशभक्ति का जोश भर दिया। उनकी दमदार प्रस्तुति और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचनाओं ने श्रोताओं में विशेष उत्साह पैदा किया। सभागार में मौजूद लोगों ने पूरे मनोयोग से उनकी कविताओं का आनंद लिया।

वहीं हरदोई के प्रसिद्ध हास्य कवि अजीत शुक्ला ने अपनी चुटीली शैली और हास्यपूर्ण रचनाओं से लोगों को खूब हंसाया। उनकी प्रस्तुति के दौरान सभागार में बार-बार ठहाके गूंजते रहे। उन्होंने रोजमर्रा के जीवन से जुड़े प्रसंगों को हास्य के रंग में ढालकर श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।

मैनपुरी की कवयित्री देवांशी माहेश्वरी ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। इसके अलावा अलवर के कमलेश जैन ‘बसंत’, पवन बाथम और सुनीत सिद्धार्थ ने अपनी-अपनी कविताओं के जरिए सम्मेलन को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। अलग-अलग विधाओं के कवियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को बहुरंगी और यादगार बना दिया।

साहित्यिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ आयोजन

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता मिथिलेश अग्रवाल ने की। कार्यक्रम के प्रारंभिक संचालन के बाद पूरे कवि सम्मेलन का संचालन अलवर के कवि कमलेश जैन ‘बसंत’ ने प्रभावशाली अंदाज में किया। उन्होंने अपनी संचालन शैली से कवियों और श्रोताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखा तथा कार्यक्रम को लगातार रोचक बनाए रखा।

आयोजन के दौरान साहित्य और संस्कृति के प्रति लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। खास तौर पर युवाओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि आधुनिक दौर में भी कविता, शायरी और साहित्य के प्रति आकर्षण बरकरार है। भरत मिलाप के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन ने धार्मिक परंपरा के साथ साहित्यिक चेतना को भी मजबूती प्रदान की।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष संजय गुप्ता ने सभी अतिथियों, कवियों, आयोजकों और उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया।

इस अवसर पर अटल गुप्ता, पवन गुप्ता, कमलेश गुप्ता, लक्ष्मीनरायन अग्रवाल, नगर पालिका अध्यक्ष शरद गंगवार, अमर सिंह खटिक, डॉ. विकास शर्मा, राजेश अग्निहोत्री, अमित सेठ, रामप्रकाश कल्लू यादव, आदेश अग्निहोत्री, मनोज कौशल, संजय बंसल, आलोक गुप्ता, संजीव शाक्य, संजीव अग्रवाल, नीरज अग्रवाल, चंदन शाक्य, आसिफ मंसूरी और अनिल गंगवार सहित अनेक गणमान्य नागरिक, साहित्य प्रेमी तथा युवा श्रोता मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, भरत मिलाप के अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कायमगंज की सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा का यादगार हिस्सा बन गया। कविता, शायरी, हास्य, व्यंग्य और वीर रस से सजी इस महफिल ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा और आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।

ब्यूरो चीफ जयपाल सिंह यादव दानिश खान

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